फिल्मी गानों की कोरियोग्राफी में एक बड़ा नाम बन चुके गणेश आचार्य इन दिनों गानों को कोरियोग्राफ करने के अलावा और क्या कर रहे हैं क्या आपको पता है? डांसर्स की सबसे पुरानी संस्था सिने डांसर्स एसोसिएशन (सीडीए) की अगर मानें तो गणेश आचार्य कोरियोग्राफी से ज्यादा आजकल राजनीति करने में लगे हैं.

सीडीए के कुछ डांसर्स को लेकर गणेश आचार्य ने एक नई एसोसिएशन खोल ली है जिसका नाम उन्होंने आल इंडिया फिल्म टेलिविजन एंड ईवेंट्स डांसर्स एसोसिएशन (एफ्टेडा) रखा है. नए साल में इसका नया ऑफिस भी खोला जा चुका है. बिना किसी चुनाव के गणेश आचार्य को कुछ वीडियोज में एफ्टेडा के प्रेसिडेंट और दूसरे सदस्यों के नामों के ऐलान करते भी देखा जा सकता है. जो उनकी टीम के ही सदस्य हैं. एफ्टेडा के सदस्यों से एक एफिडेविड भी साइन कराया जा रहा है जिसमें इस बात का जिक्र है कि डांसर इस बात से पूरी तरह सहमत है कि काम के बदले जो भी पैसा गणेश आचार्य अपनी मर्जी से उसे देंगे वो खुशी-खुशी उसे स्वीकार कर लेगा.

क्यों बनाई एफ्टेडा?

इस नई एसोसिएशन की जरूरत आखिर क्यों पड़ी तो इस सवाल के जवाब भी खुद गणेश आचार्य कुछ यूट्यूब वीडियोज में ही देते नजर आ रहे हैं. गणेश आचार्य का कहना है कि वो डांसर्स के वेलफेयर के लिए पैसा जुटाने की खातिर एक शो करने जा रहे हैं. इसमें अक्षय कुमार, वरुण धवन, आलिया भट्ट, कैटरीना कैफ जैसे बड़े स्टार्स परफॉर्म करेंगे. इस शो से जो पैसा आएगा वो उससे उन डांसर्स की मदद करेंगे, जो उनकी एफ्टेडा के सदस्य हैं.

कौन मांगेगा गणेश से हिसाब?

सवाल ये भी उठता है कि शो से आने वाला पैसा करोडों में होगा और कितना खर्च हुआ, उसका हिसाब गणेश से कौन मांगेंगा, जबकि एफ्टेडा के मेंबर्स तो पहले से ही एफिडेविड देकर सदस्य बने हैं कि गणेश मास्टरजी उन्हें जो चाहें, जैसे चाहें पैसे दें वो खुशी-खुशी उसे रख लेगें. हिसाब मांगने वाली सीडीए में तो वो पहले से ही फूट डालकर राज करने में जुटे हैं. आपको बता दें कि गणेश आचार्च सीडीए के भी सदस्य नहीं हैं, वो कोरियोग्राफर्स की एसोसिएशन में हैं लेकिन डांसर्स की एसोसिएशन में घुसपैठ करके उन्होंने इसमें दो फाड़ करवा दिए हैं.


पुरानी है सीडीए की लड़ाई

बॉलीवुड में डांसर्स से साठ के दशक में सिने डांसर्स एसोसिएशन नाम की संस्था खोली थी. सरोज खान, जयश्री टी, गणेश आचार्य, रेमो डिसूजा से लेकर डेजी शाह जैसे बड़े नाम इस संस्था से निकले और आज बॉलीवुड में अपने बड़े मुकाम तक पहुंचे. इस संस्था का अपना एक संविधान है और उसी के हिसाब से इसमें वोटिंग के माध्यम से प्रेसिडेंट, जनरल सेक्रेटरी, ट्रेजरर से लेकर बाकी ऑफिस बीयरर्स चुने जाते हैं. पिछले कुछ सालों में इसमें कई सदस्यों ने अलग से अपने लोगों को चुनने की कोशिश की, एसोसिएशन को तोड़ने की कोशिश की तो कौन सी कमेटी सही है? इसका मुद्दा कोर्ट जा पहुंचा. फिलहाल ये लड़ाई कोर्ट में चल रही है फिर भी बॉलीवुड के सभी गानों काम करने के लिए डांसर्स सीडीए से ही लिए जा रहे हैं.

क्या करती है सीडीए?

सीडीए डांसर्स की पहली और सबसे पुरानी एसोसिएशन है, जिसकी स्थापना 1960 के दशक में हुई थी. सरोज खान इस एसोसिएशन की सबसे पुरानी सदस्यों में से एक हैं. एसोसिएशन तय करता है बॉलीवुड में फिल्माए जाने वाले गानों में डांसर्स सीडीए से ही लिए जाएं. ये निर्धारित भी करती है कि किसी भी डांसर के साथ अन्याय न हो. उसे एसोसिएशन द्वारा तय किया गया कम से कम 4500 रुपए का मेहनताना मिले. एक हफ्ते में पैसा मिल जाए. रिटायर होने वाले डांसर्स को उनका सही हक मिले. डांसर्स को मेडीक्लेम जैसी तमाम जरूरी सुविधाएं मुहैया कराई जाएं. पिछले साल डांसर दीपक दमानिया के आकस्मिक निधन पर उनके परिवार को पैसा दिया गया.

नई एसोसिएशन बनाना कितना सही?

बड़ा सवाल ये भी खड़ा होता है कि इस तरह अपने-अपने स्वार्थों की पूर्ती के लिए हर आर्टिस्ट अगर अपनी-अपनी एसोसिएशन बनाने लगेगा, तो हजारों एसोसिएशन्स की बॉलीवुड में बाढ़ आ जाएगी. लोग अपने मनमर्जी से पैसे का गबन करेंगे और कौन इन संस्थाओं पर भरोसा कर सकेगा. ऐसे में गणेश आचार्य का नई एसोसिएशन बनाने का कदम कितना सही है और इसके पीछे की उनकी मंशा क्या है इसका जवाब गणेश आचार्य साफ-साफ देने से कतराते नजर आए. उनका कहना था कि मेरा इस एसोसिएशन एफ्टेडा से लेना देना नहीं है. फिर भी एफ्टेडा के नए ऑफिस के उद्घाटन से लेकर सभी वीडियोज मे वो एफ्टेडा का सपोर्ट करते नजर आते हैं. उनका दावा है कि जो भी शो करेंगे उससे आने वाला पैसा एफ्टेडा के सदस्यों के वेलफेयर में लगाया जाएगा. ऐसे में सवाल ये खड़ा होता है कि उनसे उस पैसे का हिसाब कौन मांगेगा और सीडीए में ही वो पैसा क्यों नहीं देना चाहते? जो सबसे पुरानी एसोसिएशन है.

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