अकेला

ब्राह्मण जब दरिद्र होता है तो सुदामा बनता है और क्रोधित होता है तो परशुराम बनता है। त्र्यंबकेश्वर ज्योर्तिलिंग मंदिर, नासिक के ब्राह्मण शिवसेना सरकार के लिए परशुराम बन रहे हैं। मुख्यमंत्री (सीएम) उद्धव ठाकरे को ईश्वर ‘सन्मति’ दे कि वे सुबह-शाम पूजा-अर्चना कर रहे हैं।

किसी को भी सहज इस बात पर यकीन नहीं होगा कि त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग, नासिक मंदिर के पुजारी/ब्राह्मण मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के प्रति ऐसी हिमाकत कर सकते हैं। इस संवाददाता ने दो बार नासिक जाकर इस बात की पुष्टि की। बात सच निकली। दरअसल ब्राह्मणों की यह हरकत बेजा नहीं है। उनकी मांग/समस्या कोई सुन ही नहीं रहा है।

त्र्यंबकेश्वर शहर में 300 ब्राह्मण परिवार हैं। इनमें से 700 पुजारी हैं। इन 700 में से 400 त्र्यंबकेश्वर मंदिर के पुजारी/पुरोहित हैं। वैसे त्र्यंबकेश्वर शहर में 1000 ब्राह्मण पूजा अर्चना, क्रिया-कर्म कर अपना पेट पालते हैं। अब ध्यान देने की बात है कि त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर के अंदर महामृत्युंजय, रुद्राभिषेक, लघुरूद्र और महारुद्र की पूजा की जाती है। मंदिर से दूर अहिल्या-गोदावरी नदियों के संगम स्थल पर नारायण बलि और नाग बलि की पूजा (क्रिया विधि) की जाती है। यह तीन दिन की होती है। मंदिर से दूर कुशावर्त तीर्थ स्थल पर त्रिपिंडी श्राद्ध पूजा की जाती है। और कालसर्प योग की पूजा ब्राह्मण/पुरोहित अपने-अपने घर/मठ/आश्रम में करते हैं।

पंडित प्रशांत गायधनी जी महाराज

ध्यान रहे कि त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर पूरी तरह बंद है। भक्त दूर से शिखर दर्शन करते हैं। पुरोहितों की मांग है कि प्रशासन, सरकार नारायण बलि, नाग बलि, त्रिपिंडी श्राद्ध और कालसर्प योग की पूजा करने की इजाज़त दे। यह पूजा मंदिर से बहुत दूर होगी। घर में होगी। लेकिन कोई भी अधिकारी ब्राह्मणों/पुरोहितों की सुनने को राजी नहीं। वे यह सुनने/समझने को तैयार नहीं की ब्राह्मणों की मांग क्या है ?

त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर के ट्रस्टी प्रशांत गायधनी जी महाराज ब्राह्मणों के साथ महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे से मिले। निवेदन किया कि उन्हें अपने घर में पूजा करने की इजाज़त दिलवाएं। ब्राह्मणों की अर्जी में ‘उत्तर भारतीयों की पिटाई’ और ‘टोल टैक्स पर तोड़फोड़’ जैसा प्रपोजल तो था नहीं, इसलिए राज ठाकरे ने उनकी बात पर ध्यान ही नहीं दिया। इसके बाद ब्राह्मणों का प्रतिनिधि मंडल राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) और नासिक जिले के पालकमंत्री छगन भुजबल से मिला। साथ में कांग्रेस के विधायक हिरामन खासकर भी थे। ब्राह्मणों को देखकर छगन भुजबल ने ऐसा मुंह बनाया जैसे स्टैम्प पेपर घोटाले की जांच में गठित एसआईटी के पुलिस अधिकारियों को उन्होंने देख लिया हो। ब्राह्मणों की पूरी बात सुने बिना, मात्र दो मिनट में, भुजबल ने उन्हें चलता कर दिया। ये वही छगन भुजबल हैं जिन्होंने चुनाव के वक्त अपनी बहू को त्र्यंबकेश्वर मंदिर के पुजारियों के पास भेजा था कि पुजारी यह अपील करें कि नासिक के ब्राह्मण उन्हें ही वोट दें। छगन भुजबल की बहू ब्राह्मण हैं। राज ठाकरे, छगन भुजबल से शर्मिंदा होने के बाद ब्राह्मण पूर्व मुख्यमंत्री और विरोधी पक्ष नेता देवेंद्र फडणवीस से मिले। देवेंद्र फडणवीस ने ब्राह्मणों की अर्जी तो ले ली, परन्तु ‘मी पुन्हा येईन, मी पुन्हा येईन’ बुदबुदाते हुए आगे बढ़ गए।

ऐसा कहा जाता है कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और शिवसेना हिन्दूवादी पार्टियां हैं। ब्राह्मणों ने शिवसेना के कई नेताओं और मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे तक अपनी मांग पहुंचाई लेकिन उन्हें मिला ‘बाबा जी का ठुल्लू।’ अब मंदिर के पुजारी ‘उद्धव ठाकरे को सन्मति दें’ कि पूजा कर रहे हैं। उद्धव ठाकरे सूबे के मुखिया जो हैं।

शहर में ट्रैफिक जाम है। शादियां हो रही हैं। पार्टियां हो रही हैं। राजनैतिक रैलियां हो रही हैं। सब्जी मंडियां खुली हैं। सलून खुले हैं। दुकानें खुली हैं। त्र्यंबकेश्वर मंदिर से महज 100 मीटर दूर बीयर बार खुले हैं। बीयर बारों में भीड़ है। ‘चीयर्स-चीयर्स’ की गूँज है। बस पाबन्दी है तो ‘हर हर महादेव’ के जयघोष पर। त्र्यंबकेश्वर पुलिस तो माशाअल्ला है। पुलिस के पाण्डु हवलदार बीयर बारों से हफ्ता लेने जाते हैं तो पंडितों के घर में झाँक जाते हैं कि कहीं कोई पंडित पूजा तो नहीं कर रहा ? त्र्यंबकेश्वर शहर लगभग 2 किलोमीटर के क्षेत्र में फैला है। इनमें तीन बीयर बार और एक देसी बार हैं। दो बीयर बार तो मंदिर से महज 100 मीटर के दायरे में हैं। मंदिर के एक पुजारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि पुलिस स्टेशन को मंदिर से प्रति माह 50,000 रुपये हफ्ते की अपेक्षा है। जब तक हफ्ता नहीं जाएगा पुलिस घर और घाट पर भी पूजा नहीं करने देगी। पंडितों के पास खाने के पैसे नहीं हैं तो पुलिस को हफ्ता कहाँ से देंगे।

प्रशांत गायधनी जी महाराज कहते हैं, “पुजारियों की हालत बहुत खराब है। वे भूखे मर रहे हैं। हम घर और घाट पर पूजा करने की अनुमति चाहते हैं। हमारी कोई नहीं सुन रहा। अब सब कुछ भगवान शिव के भरोसे है।”

‘उद्धव ठाकरे को सन्मति दे’ की पूजा करने के विषय पर गायधनी महाराज कहते हैं कि कोई पंडित निजी तौर पर कर रहा होगा तो उन्हें इसकी जानकारी नहीं है लेकिन ट्रस्ट की तरफ से ऐसी कोई पूजा नहीं हो रही है।

पिछले दो माह में त्रयंबकेश्वर में कोरोना का एक भी मरीज़ नहीं मिला है। पंडित कोरोना गाइडलाइन का पालन करते हुए अपने-अपने घरों में पूजा करना चाहते हैं। इतनी सी बात किसी के भेजे में नहीं बैठ रही।

 

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