पेट्रोल पंप के पार्टनर वेदप्रकाश मिश्रा के आत्महत्या मामले में नया मोड़, फिर खुलेगी फाइल, पार्टनर अर्जुन उपाध्याय से परेशान हो की थी आत्महत्या !

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काटईनाका, डोम्बिवली (पूर्व) स्थित अमरावती पेट्रोल पम्प (Amravati Petrol Pump) के मालिक अर्जुन विजयनारायण उपाध्याय (Arjun Vijaynarayan Upadhyay) की मुसीबत बढ़ सकती है। प्राथमिक जानकारी के अनुसार इस पेट्रोल पम्प के पार्टनर वेदप्रकाश मिश्रा (Vedprakash Mishra) ने अर्जुन उपाध्याय की प्रताड़ना से तंग आकर आत्महत्या (Committed Suicide) की थी। पुलिस वेदप्रकाश मिश्रा के आत्महत्या की फाइल को फिर से खोल सकती है।

गुरुवार, 10 मार्च 2022 को वेदप्रकाश मिश्रा की विधवा पत्नी पूर्णिमा मिश्रा ( (Poornima Mishra) ने कोलसेवाड़ी पुलिस स्टेशन (Kolsewadi Police Station) के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक से मुलाकात कर अपनी शंका प्रकट की। जांच में दोषी पाए जाने पर अर्जुन उपाध्याय के खिलाफ आत्महत्या के लिए मजबूर करने की एफआईआर दर्ज करने की भी गुजारिश की।

अर्जुन उपाध्याय मुंबई के उपनगर सायन में रहता है। ओम साईं ऑटोमोबाइल्स (Om Sai Automobiles) कंपनी में यह भागीदार है। यह कंपनी पेट्रोल पम्प के व्यवसाय में है और डोम्बिवली में अमरावती पेट्रोल पम्प का संचालन करती है। ओम साईं ऑटोमोबाइल्स कंपनी का कार्यालय कल्याण (पूर्व) के चिंचपाड़ा गांव में है। 14 जनवरी 2012 को एक भागीदार सभाजीत दुबे (Sabhajeet Dubey) की स्वाभाविक मौत (Natural Death) हो गई थी तो 26 जुलाई 2012 को वेदप्रकाश मिश्रा (Vedprakash Mishra) ने अपने कोलसेवाडी के घर में आत्महत्या कर ली थी।

पूर्णिमा मिश्रा की शिकायत पर कोलसेवाड़ी पुलिस ने 26 फरवरी 2022 को अर्जुन उपाध्याय के खिलाफ भादंसं की धारा 420 और 406 के तहत एफआईआर (नंबर- 100/2022) दर्ज की है। अर्जुन उपाध्याय ने सेन्ट्रल बैंक ऑफ़ इण्डिया की कल्याण (पूर्व) शाखा से कंपनी के खाते से 20,56,403 रुपये अपने निजी खाते में ट्रांसफर कर लिए। तब के बैंक मैनेजर (Bank Manager) मलय कुमार रे (Malay Kumar Ray) ने भी पुलिस को बयान दिया है कि अर्जुन उपाध्याय ने बैंक को गुमराह करके रुपये ट्रांसफर किये हैं। इसी मामले में अर्जुन उपाध्याय को कल्याण कोर्ट से अंतरिम राहत (Interim Protection) मिली हुई है।

अर्जुन उपाध्याय के खिलाफ मुम्ब्रा पुलिस स्टेशन में (Mumbra Police Station) भी भादंसं की धारा 286, 338, 308 और एक्सप्लोसिव सब्स्टेंस की धारा 3, 4, 5, 6 के तहत एफआईआर (नंबर II-06/2016) दर्ज है। अर्जुन उपाध्याय ने 10 जनवरी 2016 को गैर कानूनी तरीके से एक कंस्ट्रक्शन साइट पर ब्लास्ट किया जिसमें 10 मजदूर बुरी तरह घायल हो गए थे। इस मामले में भी अर्जुन उपाध्याय को गिरफ्तारी पूर्व जमानत मिल गई थी। इससे अर्जुन उपाध्याय का दिमाग खराब हो गया। यह न्यायालय और पुलिस को मजाक समझने लगा।

पूर्णिमा मिश्रा ने एबीआई (Akela Bureau of Investigation) को बताया कि उनके पति वेदप्रकाश मिश्रा की आत्महत्या के पीछे अर्जुन उपाध्याय का हाथ हो सकता है। कुछ माह से पूर्णिमा मिश्रा ने पेट्रोल पम्प पर जाना शुरू किया तो अर्जुन उपाध्याय ने उन्हें भी जलील करना शुरू किया। अर्जुन बोलता था कि तुम यहां क्यों आती हो। अब तुम्हारा इस पेट्रोल पम्प से कोई वास्ता नहीं है। उसने कड़े शब्दों में पेट्रोल पम्प पर ना आने की हिदायत दे दी। अर्जुन का व्यवहार देख पूर्णिमा आश्चर्यचकित रह जाती थीं। इस बीच अर्जुन ने बैंक से रुपये निकाल लिए। फिर पूर्णिमा का शक पुख्ता हो गया कि उनके पति की आत्महत्या के पीछे अर्जुन का व्यवहार है। तब काफी छानबीन के बाद भी पुलिस अथवा पूर्णिमा को आत्महत्या के कारणों का पता नहीं चल पाया था। इसलिए पुलिस ने फाइल बंद कर दी थी। अब पूर्णिमा ने फाइल को फिर से खोलने और अर्जुन को जिम्मेदार ठहराने की सिफारिश की है।

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