प्रकाश मुले

अकेला 

मेसर्स माखीजा कंस्ट्रक्शन के मालिक हर्ष माखीजा (Harsh Makhija owner of M/S Makhija Construction) ने उद्यान/मनोरंजन के लिए आरक्षित भूखंड (Plot reserved for garden) पर पांच मंजिली इमारत बना दी। तात्कालिक विरोधी पक्ष नेता राजू जग्यासी ने 21 अगस्त 2012 को, नगरसेविका मीना सोंडे ने 5 नवम्बर 2018 को, समाजसेवक दीपक मंगतानी ने 22 फरवरी 2019 को, वरिष्ठ नगरसेवक राजेन्द्रसिंह भुल्लर ‘महाराज’ ने 31 जनवरी 2022, 2 फरवरी 2022 और 8 जून 2022 को इस इमारत के खिलाफ शिकायतें कीं। बिल्डिंग पूर्णतः अवैध है। न्यायालय में मामला भी विचाराधीन है। फिर भी अधिभोग प्रमाणपत्र (Occupancy Certificate) दे दिया ‘ओसी माफिया’ प्रकाश मुले (OC Mafia Prakash Mule) ने।   

8 मई 2023 को पुनः शिकायत कर राजेंद्रसिंह भुल्लर ‘महाराज’ (Rajendrasingh Bhullar ‘Maharaj’) ने प्रकाश मुले और संबंधितों के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज करने की मांग की है। प्रकाश मुले उल्हासनगर महानगरपालिका में नगर रचनाकार (Prakash Mule is Town Planner in Ulhasnagar Municipal Corporation) है। एबीआई (ABI) ने उसे ‘ओसी माफिया’ सम्बोधित किया है। इसके मायने हैं। एबीआई (Akela Bureau of Investigation) भविष्य में बताएगा कि प्रकाश मुले ओसी माफिया कैसे है। 

राजेंद्रसिंह भुल्लर (महाराज) 

हर्ष माखीजा (Harsh Makhija) ने वर्ष 2012 में यू नंबर- 127, 128, प्लॉट नंबर-98, सीटीएस नंबर- 9140(ए), उल्हासनगर-3 में वास्तु विशारद शरद जोगलेकर के जरिये इमारत निर्माण कार्य की इज़ाज़त ली। निर्माण कार्य शुरू नहीं किया। फिर शरद जोगलेकर ने वर्ष 2016 में सुधारित निर्माण के लिए इज़ाज़त मांगी। 5 अगस्त 2016 को पुनः इज़ाज़त मिल गई। माखीजा ने फिर भी निर्माण कार्य शुरू नहीं किया जबकि नियमतः उसे इज़ाज़त मिलने के एक वर्ष की अवधि के अंदर ही निर्माण कार्य शुरू करना था। उसने इज़ाज़त नूतनीकरण भी नहीं करवाया। महत्वपूर्ण बात कि वर्ष 2013 में उक्त भूखंड को उद्यान/मनोरंजन के लिए आरक्षित कर दिया गया था। फिर भी प्रकाश मुले जितना ही करप्ट रहे नगर रचनाकार संजीव कर्पे ने वर्ष 2016 में निर्माण प्रारम्भ की इज़ाज़त दे दी। प्लान पास कर दिया।  

एबीआई ‘इट हैपेन्स ओनली इन उल्हासनगर’ (IT HAPPENS ONLY IN ULHASNAGAR) यूँ ही नहीं लिखता। महानगरपालिका में एक से एक नमूने भरे पड़े हैं। पैसा खाने के बाद वे अपनी भूमिका बड़ी इमानदारी से निभाते हैं। जैसे भूखंड उद्यान/मनोरंजन के लिए आरक्षित था फिर भी जूनियर इंजीनियर ने उसे अपनी रिपोर्ट में कॉमर्शियल प्लॉट बताया। हर्ष माखीजा ने इमारत निर्माण कार्य की इज़ाज़त मेसर्स माखीजा कंस्ट्रक्शन के नाम ली है। लेकिन अधिभोग प्रमाणपत्र (Occupancy Certificate) किसी राम नानकानी के नाम ली है। अर्जी में सम्बंधित अधिकारी ने टिप्पणी की है कि राम नानकानी ने किसी भी प्रकार के सपोर्टिंग डॉक्युमेंट्स सब्मिट नहीं किये हैं। डॉक्युमेंट्स में इसका भी ज़िक्र है कि हर्ष माखीजा ने 132.24 वर्ग मीटर ज़्यादा (अवैध) निर्माण कर लिया है।

एक गंभीर विषय। महापालिका आयुक्त ने 7 जनवरी 2019 को निर्माण कार्य पर स्टे दे दिया था परन्तु नगर रचनाकार ने आयुक्त को अँधेरे में रखकर खुद अधिभोग प्रमाणपत्र (Occupancy Certificate) दे दिया। फाइलों में उलझते उलझते मामला कल्याण कोर्ट में पहुँच गया। वहां भी महानगरपालिका के विधि विभाग ने मैटर ठीक से फॉलो नहीं किया। तारीख पर सम्बंधित अधिकारी गया ही नहीं। न्यायालय ने एकतरफ़ा फैसला दे दिया। टेक्निकली मामला अभी भी कोर्ट में पेंडिंग है। परन्तु प्रकाश मुले ने अपने रिस्क पर अधिभोग प्रमाणपत्र (Occupancy Certificate) दे दी। यही ओसी दिखाकर फ़्लैट मालिकों ने बैंक से लोन लिया हुआ है। मतलब बैंक के साथ भी चीटिंग हो गई।  

भुल्लर महाराज (Bhullar Maharaj), मीना सोंडे (Meena Sonde), राजू जग्यासी (Raju Jagyasi), दीपक मंगतानी (Deepak Mangtani) की शिकायतें साबित करती हैं कि इमारत पूरी तरह अवैध है। प्लॉट आरक्षित, आयुक्त का स्टे, मैटर कोर्ट में। इन सबको लात मारते हुए प्रकाश मुले ने ओसी दे दी। भुल्लर महाराज ने मांग की है कि मामले की गहनता से जांच की जाए। प्रकाश मुले जांच में दोषी पाया ही जाएगा। प्रकाश मुले और सम्बंधित अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए। मेसर्स माखीजा कंस्ट्रकशन (बिल्डिंग) पर भी कार्रवाई की जाए।

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