अजीत भाटिया

अकेला 

अथ श्री420 अजीत भाटिया कथा : अध्याय अखंड की अगली कड़ी में आज पढ़िए कि अवैध निर्माण करने पर उल्हासनगर महापालिका ने अजीत भाटिया के खिलाफ एमआरटीपी के तहत  एफआईआर की थी। महापालिका प्रशासन ने जनता से आह्वान किया था कि अजीत भाटिया की कोहिनूर प्लाजा बिल्डिंग में कोई भी फ्लैट या कॉमर्शियल गाला न खरीदे। अजीत भाटिया ने अवैध निर्माण किया था। (Ulhasnagar Municipal Corporation registered FIR under MRTP act against Ajit Bhatia and others).

तब महापालिका अधीक्षक नितेश रंगारी (Corporation Superintendent Nitesh Rangari) की शिकायत पर 4 मार्च 2015 को विट्ठलवाड़ी पुलिस (Vitthalwadi Police) ने अजीत भाटिया (Ajit Bhatia), उसके पार्टनर शंकर सेवलानी (Shankar Sevlani), आर्किटेक्ट किशन नैनवाणी (Kishan Nainwani), जमीन मालिक विकास केदारे (Vikas Kedare) और रमेश झाल्टे (Ramesh Jhalte) के खिलाफ महाराष्ट्र प्रादेशिक नगर रचना अधिनियम 1966 की धारा 52, 53 और 54 के तहत एफआईआर दर्ज की थी। एफआईआर की कॉपी एबीआई (abinet.org) के पास मौजूद है। 

अजीत भाटिया ने 10 जनवरी 2011 को आर्किटेक्ट एम. के. कपोते (Architect MK Kapote) के मार्फ़त महापालिका में इमारत प्लान पास के लिए अर्जी दी। 9 मई 2013 को महापालिका ने उसे निर्माण कार्य प्रारम्भ करने की परमीशन दे दी। तब अजीत भाटिया और शंकर सेवलानी ने यू नंबर-२८२, सीट नंबर-15, सीटीएस नंबर-30381, निकट उल्हासनगर रेलवे स्टेशन (पूर्व), उल्हासनगर-4 में कोहिनूर प्लाज़ा (Kohinoor Plaza) नाम से मेसर्स रे इंटरप्राइजेस (M/S Ray Enterprises) के बैनर तले सात मंजिली इमारत का निर्माण कार्य शुरू किया। 


राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ता सरदार रवींद्रसिंह पूरणसिंह सिक्ख (NCP worker Sardar Ravindrasingh Pooransingh Sikkh) ने 9 मई 2013 को कोहिनूर प्लाजा (Kohinoor Plaza) में अवैध निर्माण कार्य होने की शिकायत कर दी। आदतन महापालिका प्रशासन ने रवींद्रसिंह सिक्ख की शिकायत पर ध्यान नहीं दिया। फिर रवींद्रसिंह ने धमकी दी कि यदि महापालिका प्रशासन अजीत भाटिया के खिलाफ कार्रवाई नहीं करता तो वे 26 जनवरी 2015 को महापालिका मुख्यालय में आग लगाकर आत्महत्या कर लेंगे। तब महापालिका प्रशासन नींद से जागा। रवींद्रसिंह सिक्ख की शिकायत पर महापालिका मुख्यालय में 1 जनवरी 2015 को सहायक आयुक्त दीपक ढोले, कनिष्ठ अभियंता विनोद खामितकर ने शंकर सेवलानी से जवाब माँगा। शंकर सेवलानी कोई उचित जवाब नहीं दे पाया। रवींद्रसिंह सिक्ख की शिकायत सही पाई गई। विनोद खामितकर ने भी साइट विजिट किया और 15 जनवरी 2015 को रिपोर्ट दी कि अजीत भाटिया ने अवैध निर्माण किया है। इस बाबत महापालिका प्रशासन ने अजीत भाटिया, शंकर सेवलानी, विकास केदारे, रमेश झाल्टे और आर्किटेक्ट किशन नैनवाणी को एमआरटीपी कानून-1966 की धारा 52, 53 और 54 के तहत नोटिस दी और पुलिस में उन्हीं धाराओं के तहत एफआईआर भी दर्ज करवा दी। 

अजीत भाटिया ने महापालिका से पास प्लान का उल्लंघन कर 307. 60 वर्ग मीटर (लगभग 3,500 फुट) ज़्यादा निर्माण कर दिया था। 

इतना ही नहीं, 4 मार्च 2015 को मुंबई के फ्री प्रेस जर्नल समाचार पत्र में उल्हासनगर महापालिका प्रशासन ने आम अपील प्रकाशित की। अपील में लिखा गया कि अजीत भाटिया की कोहिनूर प्लाजा बिल्डिंग अवैध है। इस बाबत उसे नोटिस भी दी गई है। परन्तु अजीत भाटिया निर्माण कार्य रोक नहीं रहा है। लिहाज़ा जनता से अपील की जाती है कि कोहिनूर प्लाज़ा में फ्लैट अथवा कॉमर्शियल गाला न खरीदें। अपील के बावजूद कोई कोहिनूर प्लाज़ा में खरीदी करता है तो उस आर्थिक नुकसान का जिम्मेदार वह खुद होगा। 

इतना सब होने के बावजूद कोहिनूर प्लाज़ा पर तोड़ू कार्रवाई नहीं हुई। अजीत भाटिया सहित कोई भी आरोपी गिरफ्तार नहीं हुआ। इसका कारण शंकर सेवलानी ने कुछ दिन पहले एक व्यक्ति को बताया। कहा -तुमको पता नहीं है। हम पुराने बदमाश हैं। 

खैर, अजीत भाटिया उल्हासनगर का श्री420 तो है ही।

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